इस्राइल हमास की जंग जो अब जाकर इस्राइल फिलिस्तीन की जंग बन पाई है, उसका दायरा बढ़ता हुआ देखा जा सकता है। हमास ने इस्राइल पर दुस्साहसिक
हमला कर स्वयं को हीरो साबित करने का प्रयास किया जो इस्राइल के सख्त प्रतिरोध से
उलट पड़ गया।अब अपनी चाल बदलते हुए हमास और मुस्लिम संसार इसे बेचारे फिलिस्तीन का
शोषण के विरुद्ध प्रतिकार बनाने में लगे हैं। दुनिया भर में मुस्लिमों को सड़कों पर
एक नियोजित तरीके से उतारा जा रहा है। अमेरिकी दूतावास, अड्डे,
नागरिक और इस्राइल का समर्थन करने वाले लोग निशाने पर हैं। युद्ध मे
आतंकी संगठन और मुस्लिम देश दुनिया भर के
मुस्लिमों को हथियार की तरह प्रयोग करेंगे। देर सबेर नाटो को युद्ध मे सक्रिय होना
पड़ सकता है, तब नाटो को दबाव में लेने के लिए ये सड़को पर 'तेरा मेरा नाता क्या...' चिल्लाने वाले काम आएंगे।
युद्ध
की निरंतर बदलती परिस्थितियां क्या मोड़ लेगी फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन ये
ज़रूर सोचने लायक विषय है कि नॉन-इस्लामिक मुल्कों से बाहर इस्लाम को मानने वालों
का प्रसार कितने गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है। जिस देश मे ये रह रहे हैं
उसके तो कभी होंगे नहीं, लेकिन जिस लड़ाई से इनका एक रत्ती का भी नाता नहीं है
उसके लिए उस देश को आग में झोंक देंगे जो इन्हें पाल रहा है। मानवता और उदारवादी
सोच के नाम पर दुनिया भर में शरणार्थी बन कर शरण पाने वाले मुस्लिम, अवैध घुसपैठ के द्वारा इनकी बाढ़ सब कुछ बहुत नियोजित तरीके से गैर मुस्लिम
देशों के साथ किया जा रहा है, ऐसा पहली बार सुनने को मिला है
कि जॉर्डन और मिस्त्र में इन फिलिस्तीनी शरणार्थियों को
भेजने की बात की जा रही हालांकि अभी तक इन दोनों देशों ने इसकी सहमति नहीं दी है।
ये देश इनको बसाने के बजाय युद्ध मे कूद जाएं तो आश्चर्य नही होना चाहिए, हाँ यदि कोई गैर मुस्लिम देश यहाँ होता तो दुनिया भर के मुस्लिम संगठन, देश उस बेचारे देश को इन मुसलमानों से भर देते। याद कीजिये कैसे लाखों
बंगलादेशी मुसलमानों को भारत में घुसेड़ दिया गया। हज़ारों रोहिंगया को भारत के
आंतरिक इलाकों में बसा दिया गया। कैसे इस युद्ध में भी मुसलमान फिलिस्तीन के पक्ष
में लामबंद होकर नीति को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। संदेश साफ है ये टकराव
है इस्लाम की सनक का शेष नॉन-इस्लामिक जगत से। ये जब तक आप प्रतिकार नही करेंगे
आपको नोचेंगे, काटेंगे बर्बाद करेंगे। जब आप प्रतिकार करेंगे
तो ये इस्लामी कार्ड खेलेंगे, जो आपके धन, संसाधन, ज़मीन पर पल रहे हैं वो आस्तीन के साँप आपको
डसेंगे। इस्राइल का प्रतिकार,उसका चरित्र हर उस देश को
अपनाने की ज़रूरत है जो इस्लाम की जिहादी सनक का मुकाबला कर ज़िंदा रहना चाहता है।
20.10.23

इस जंग में उन सभी को सहायक बनना चाहिए जो इस्लामिक आतंकवाद से मुक्ति चाहते हैं. बहुत से इस्लामिक देश भले ही इसमें हमास या फिलिस्तीन के साथ हों मगर नैतिक रूप से ये सही नहीं है. इस्लामिक आतंकवाद का जो दर्द भारत ने सहा है, उसे देखते हुए सभी को इससे सबक लेना चाहिए.
जवाब देंहटाएंइस बार यदि इस्लामिक आतंकवाद को न सुधार सके तो फिर आगे बहुत मुश्किल होगा.