रविवार, 10 सितंबर 2023

जी-20 सम्मलेन उद्घोषणा है नए गरजते, चमकते, उठते, ताकतवर भारत की

पिछले दो दिनों से देश की राजधानी वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है. दिल्ली की चमक से पूरा संसार अचंभित है. ये अवसर रहा जी-20 की मेजबानी का, जो इस बार इसका अध्यक्ष होने के नाते भारत द्वारा की गई. बाली, इंडोनेशिया सम्मेलन में यह निश्चित किया गया गया कि आगामी अध्यक्षता भारत को दी जाए, इसी कारण जी-20 का अठारहवाँ शिखर सम्मेलन भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया गया. इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रतिनिधि सम्मिलित हुए. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव, डब्लूएचओ के डीजी, विश्व बैंक के अध्यक्ष आदि जैसे विशिष्ट मेहमान भी उपस्थित हुए. इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री द्वारा कुछ गैर सदस्य देशों को भी आमंत्रित किया गया. भारत की मेजबानी ने दुनिया भर से आये मेहमानों को न सिर्फ सम्मोहित किया अपितु अविस्मरणीय यादों का एक आलेख उनके हृदय में भी अंकित कर दिया. विश्व की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जी-20, जो वैश्विक व्यापार और राजनीति पर गहरा प्रभाव रखता है. यह विश्व की लगभग दो तिहाई आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 85 प्रतिशत, विश्व व्यापार का 75 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है. 




इसकी स्थापना वर्ष 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद की गई थी. इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक समस्याओं पर चिंतन करना, वित्त का प्रबंधन एवं महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच देना है. अमेरिका, रूस, चीन, भारत, इटली, जापान, ब्रिटेन आदि जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियाँ इसकी सदस्य हैं. अभी तक इसमें 19 देश और यूरोपीयन यूनियन सहित कुल 20 सदस्य थे किन्तु नई दिल्ली में हुए वर्तमान शिखर सम्मेलन में भारत के प्रस्ताव पर अफ्रीकन यूनियन को भी सदस्यता प्रदान कर दी गई है. इस प्रकार यह 21 सदस्यों का एक आर्थिक मंच बन गया है.


इस बार का यह सम्मेलन कई मायनों में विशेष और अविस्मरणीय रहा. न सिर्फ भारत के 60 शहरों में 200 से भी अधिक बैठकें आयोजित की गईं बल्कि दिल्ली को नये भारत का परिचय बना कर इस तरह प्रस्तुत किया गया कि दुनिया दंग रह गई. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों, व्यवस्थाओं में भारतीय क्षमता को पूरी दुनिया ने देखा. भारतीय सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं अपितु अभूतपूर्व मेजबानी का भी भारत ने अनुभव कराया. भारत मंडपम की शान, दिल्ली की सुंदरता, हमारी भव्य, विराट संस्कृति की झलक, कोर्णाक का चक्र, नटराज की विशाल अलौकिक मूर्ति, नालंदा के खंडहरों की प्रतिकृति, हस्तशिल्प आदि को भारत का प्रतीक बना कर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया. इस आयोजन में भारत ने अपने वैभवशाली इतिहास, संस्कृति के साथ-साथ उन्नत, विकसित वर्तमान की ऐसी छवि प्रस्तुत की जिसे बस अलौकिक ही कहा जा सकता है. भारतीय संस्कृति को विदेशी मेहमानों ने केवल देखा ही नहीं बल्कि बहुतों से उसे आत्मसात भी किया. इसकी खूबसूरती तब देखने को मिली जबकि महामहिम द्वारा दिए गए रात्रिभोज में कई विदेशी मेहमान भारतीय परिधानों में नजर आये.






ऐसा नहीं है कि देश की अध्यक्षता, मेजबानी में सम्मिलित अतिथियों ने सिर्फ यहाँ की संस्कृति के, यहाँ के इतिहास के, यहाँ के शिल्प के ही दर्शन किये बल्कि यहाँ आकर उनको देश की वैचारिक समृद्धता से भी उनका परिचय हुआ. सम्मेलन की थीम ‘वन अर्थ, वन फैमली, वन फ्यूचर’ रही जो हमारी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की उस शाश्वत, सनातनी सोच का प्रतिनिधित्व करती है जो समस्त विश्व को एक परिवार मानती है. आज के युद्धकाल में इस तरह की सोच का वैश्विक प्रसार करने की मानसिकता उसी देश की हो सकती है, जिसने इसे स्वयं में आत्मसात कर रखा हो.


सम्मेलन के आरंभ से ही तमाम आलोचक इसकी असफलता की भविष्यवाणी कर रहे थे. यूक्रेन युद्ध के कारण रूस-अमेरिकी तनाव, भारत-चीन संबंधों में तनाव को देखते हुए भले ऐसा कहा जा रहा हो किन्तु भारत ने अपनी राजनयिक कुशलता का परिचय देते हुए बहुत बड़ा कद प्राप्त कर लिया है. सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति बाईडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की उपस्थिति ने नए अध्याय जोड़े वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इस सम्मेलन से दूरी बनाये रखने को अपनी फजीहत होने से बचने वाला कदम बताया गया. इसका एक और बड़ा कारण भारत और अमेरिका के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंध भी है.


इसे भारत की राजनयिक सफलता ही कही जाएगी कि एक ही मंच पर अमेरिका,चीन, रूस शामिल हुए, यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई तथा पहले दिन ही घोषणापत्र का निर्विरोध जारी होना रहा. नई दिल्ली घोषणापत्र का जारी होना भारत की कूटनीतिक, राजनयिक कुशलता का प्रतीक है. यह भारतीय राजनय की प्रभावशालिता का नया दौर है. तमाम महत्वपूर्ण भू राजनीतिक मुद्दों, मानव केंद्रित विकास, बायोफ्यूल्स के लिए सहयोग, आतंकवाद, फाटा की कार्यवाहियों को सख्त करने, अर्थ प्रबंधन, अधिक वित्त और ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रीन क्रेडिट, सतत समावेशी विकास, विश्वास बहाली के उपायों जैसे वैश्विक मुद्दों पर आम राय बनी और सहयोग का मार्ग खुला. भारत के संदर्भ में सबसे महत्पूर्ण विषय चीन के ‘वन रोड वन बेल्ट’ को काउंटर बैलेंस करने के लिए यूरोप, मध्य एशिया और भारत के मध्य आर्थिक गलियारे के निर्माण पर सहमति होना है. यह भारतीय सामानों की आसान पहुँच इन बाज़ारों तक कर देगा साथ ही साथ द्विपक्षीय व्यापार को भी बढ़ाएगा.


इस सम्मेलन ने भारत को वैश्विक राजनीति के केंद्र में खड़ा कर दिया है. आज का यह भारत जानता है कि भारतीय हितों को कैसे संवर्धित करना है. वह बड़ी शक्तियों से संतुलन साधने के साथ-साथ पिछड़े देशों की आवाज़ भी बना है. अफ्रीकन यूनियन को सदस्यता देना इसका प्रतीक है. सम्मेलन अपने लक्ष्यों को पाने में सफल रहा. तमाम खतरों के बाद भी भारत ने यह दिखा दिया कि वह बड़ी भूमिकाओं के लिए पूरी तरह से तैयार है. वह दक्षिणी भू-मंडल का नैसर्गिक नेतृत्वकर्ता है. जी-20 शिखर सम्मलेन उद्घोषणा है नए गरजते, चमकते, उठते, ताकतवर भारत की.




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